Saturday, January 10, 2009

रे मर जाएगा क्यूँ सोचे है ...

गुरु देव पंकज सुबीर जी के आशीर्वाद से तैयार ये ग़ज़ल ...

कल क्या होगा,क्यूँ सोचे है
मर जाएगा, क्यूँ सोचे है ॥

खुद को तक, गिरवी रक्‍खा है
बिक जाएगा ,क्यूँ सोचे है

अपना घर कितना अपना है
वो आएगा ,क्यूँ सोचे है ॥

शेर नहीं दिल, के छाले हैं
वो समझेगा ,क्यूँ सोचे है ॥

बीत गया जो, रीत गया जो
फ़िर लौटेगा ,क्यूँ सोचे है ॥

अर्श है बेबस ,इस दुनिया में
पछतायेगा , क्यूँ सोचे है ॥

प्रकाश"अर्श"
११/०१/२००९

5 comments:

  1. कल क्या होगा,क्यूँ सोचे है
    मर जाएगा, क्यूँ सोचे है ॥
    accha quote hai ye to dost....

    अर्श है बेबस ,इस दुनिया में
    पछतायेगा , क्यूँ सोचे है ॥

    wah wah....

    ek meri taraf se:

    jo khota hai, wo paata hai
    tu paayega,kyun soche hai?


    badi aaram se ghazlein padh raha hun aapki, zaldi main comment kar raha hoon.....
    ...aage badhoon...

    ReplyDelete
  2. बहुत आच्छा लिखा हॅ
    Keep it up...............

    ReplyDelete
  3. बीत गया जो, रीत गया जो
    फ़िर लौटेगा ,क्यूँ सोचे है ॥-aadmi nadan hai arsh sahab!jo nahi sochna chahiye wahi soch sochkar dukhi hota rahta hai.mere sher ko nawazne ka shukriya.main 20 jan ko gudgaon 'map india'ke ashok chakradharji kavi sammelan me aayi thi.

    ReplyDelete
  4. Kya Khooooooob!
    Bahut achhi ghazal hai....
    खुद को तक, गिरवी रक्‍खा है
    बिक जाएगा ,क्यूँ सोचे है ॥

    wah wah !

    Aapki anya ghazal bhi bahut achhe lage...aapki lekhan and chintan dono lajawab hai!

    ReplyDelete
  5. You have a very good blog that the main thing a lot of interesting and beautiful! hope u go for this website to increase visitor.

    ReplyDelete

आपका प्रोत्साहन प्रेरणाश्रोत की तरह है ... धन्यवाद ...