Thursday, January 1, 2009

है मुनासिब के याद-दाश्त मेरी ग़लत हो ...

वो कौन है जो मेरी तरह दिखता है ।
है मेरा अक्स या मेरी तरह दिखता है ॥

देखकर उड़ते परिंदों को दिल मेरा रोए
उड़ान तू भी तरसे तो मेरी तरह दिखता है ॥

लहू को उसके रगों का मुआयना कर लो
लहू सा है तो फ़िर मेरी तरह दिखता है ॥

मैं हूँ जो बस गैरते-साजिश में मारा गया
तू ठुकराया हुआ है तो मेरी तरह दिखता है ॥

है मुनासिब के याद-दाश्त मेरी ग़लत हो
वादा उसने किया था जो मेरी तरह दिखता है ॥

होता एहसास अगर"अर्श"अपने जुल्मों का
ना करता चर्चे अगर मेरी तरह दिखता है ॥

प्रकाश"अर्श"
०१/०१/२००९

1 comment:

  1. aha this is the best makta of the entire blog:

    वो कौन है जो मेरी तरह दिखता है ।
    है मेरा अक्स या मेरी तरह दिखता है ॥
    (do do shaklein dikhti hai....
    mere saath chala aaya hai mera ek saudai bhi)
    -Gulzaar)


    मैं हूँ जो बस गैरते-साजिश में मारा गया
    तू ठुकराया हुआ है तो मेरी तरह दिखता है ॥

    haan ye wali line makte ko poora karti dikht hai bhav ke mamle main...
    laga makta prashn aur ye uttar!!
    comment likhte likhte thak gaya par,
    isne to appetizer ka kam kiya....
    aaage kya hai dekhu?

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आपका प्रोत्साहन प्रेरणाश्रोत की तरह है ... धन्यवाद ...